रति भाव व अभिनय / रति भाव का पाठ कनै खिलण
तामभिनयेत्स्मितवदनमधुरकथनभ्रूक्षेपकटाक्षदिभिरनुभावै:
(7 .8 को परिवर्ती भाग )
रति पाठ खिलणोकुण मुख पर मिठास , मुस्कान, कोमल भंगिमा , मिठ बोल
, भृकुटि विक्षेप / धनुष चढ़ाण जन प्रतिक्रिया , कटाक्ष आदि क्रियाओं क अनुसरण करण पड़द।
एक गढ़वाली लोकनाटक स्त्रियों द्वारा गीतुं (चैत ) म खिले गे छौ। नाटक एक सत्य घटना पर आधारित छौ अर तब लक गीत बि प्रचलित ह्वे छौ।
घटना छे बल एक अध्यापक का ब्यौथा स्त्री से अवैध संबंध ह्वे गे तो प्रेमालाप -
अध्यापक (प्रेमिका तै प्रसन्न करणो पर्यटन करदो ) -हे बांद ! तू आज भौति बिगड़ैलि लगणी छे।
प्रेमिका ( लज्जायुक्त , सरैल तै ट्याड़ करदी जन बेल हूंद ) - ह ह ! किलै झूठ .. अं .. अं ?
अध्यापक (ुतः, ुलार, ढाढ़स , प्रेम युक्त मिठ भौणम ) - सच्च ! तू तो आज औँसी रातै जून (चाँद लगणी छे।

0 Comments