हास भाव अभिनय /हौंस चित्त वृति कु पाठ खिलण
परचेष्टानुकरणाद्धास: समुपजायते ।
स्मितहासातिहसितैरभिनय: स पण्डितै
। 7 . 10 ।
हास क पाठ खिलणौ (अभिनय ) कुण हौर लोकुं कार्य क उपहासपूर्ण अनुकरण 'हास' तै जन्म दींद। यांक अतिरिक्त, अनर्थक अव्यवस्था पैदा करण ,दोष दृष्टि से छिद्रान्वेषण करण पर जु
रौंस मिल्द वी 'हास' चित्त वृति च। हौस उत्पन्न हूण से हौंस लगद /आंद।
हौंस छह प्रकार कु हूंद -
स्मित - म दंत पाटी नि दिख्यांदि , गल्वड़ थोड़ा फुल्यां, अर दृष्टि सुंदर व कटाक्ष युक्त हूंद।
हसित - मुख अर आँख चौड़ा (विकसित ) होवन , गल्वड़ पूर फुल्यां ह्वावन , अर दांतु पाती थोड़ा सा इ दिख्यांदि।
विहसित - हंसद समौ आँख अर गल्वड़ आकुंचित हूंदन अर गिच्च ब्रिटेन मिठ ध्वनि व मुख पर लालिमा हूंद ।
उपहासित - म नाक फुलिं दिखेंद। दरसिहति ट्याड़ि , अर कंधा व आँख आकुंचित /घुमावदार हूंदन।
अपहसित - हंसद हंसद आंख्युं म पाणि आणु रौंद अर मुंड व कंदा कमणा (कम्पन ) रौंदन ) I जब अधिक देर तक हो तो पुचक पर हाथ चल जांद आदि

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