शोक भाव अभिनय / शोक भावक पाठ खिलण
सस्वनरुदिताक्रांदितदीर्घानि:
श्वसितजडतोन्मादमोहमरणादिभिरनुभावैरभिनय:
प्रयोक्तव्य: I (७। १० को परवर्ती कारिका )
शोक भावक पाठ खिलणो कुण शनैः शनैः रूण , कबि कबि किराण,कबि लम्बी सांस लीण /उसासी लीण , कबि जम जाण /जड़ ह्वे जाण , कबि बौळेण , कबि मोह दिखाण, कबि मोरण जन करतबों अनुकरण आदि जन अभिनय करे जांद।
गढ़वाली हंत्या जागर शोक भाव को सबसे उत्तरम उदाहरण च। इखम एक हन्त्या जागर व एक लोक गीत दिए गेन जो शोक भाव दर्शांदन -
हंत्या जागर का प्रथम भाग
मृत पितर अथवा पुरखों की लालसा को गढवाली-कुमाउनी में हंत्या कहते हैं
ओ ध्यान जागि जा
ओ ध्यान जागि जा
गाड का बग्यां को ध्यान जागि जा
ओ ध्यान जागि जा
भेळ का लमड्याञ को ध्यान जागि जा
ओ ध्यान जागि जा
डाळ का लमड्याञ को ध्यान जागि जा
फांस खैकि मरयाँ को ध्यान जगी जा
ओ ध्यान जागि जा
जंगळ मा बागक खयां को ध्यान जागि जा
ओ ध्यान जागि जा
घात प्रतिघात का मोर्याँ को ध्यान जाग
आतुर्दी मा मरयाँ को ध्यान जागि जा
भूत देवता परमेश्वर महाराज
हरि का हरिद्वार जाग -- धौळी देवप्रयाग जाग
जै रण का मोर्याँ तै रण का ध्यान जाग ..
आकस्मिक अपघात मृत्यु का रवांल्टी करुण-दारुण लोक गीत
(सन्दर्भ: महावीर रंवाल्टा, 2011, उत्तराखंड में रंवाइ क्षेत्र के लोक साहित्य की मौखिक परंपरा, उदगाता, पृष्ठ 48- 56 )
( इंटरनेट प्रस्तुति एवं अतिरिक्त व्याखा - भीष्म कुकरेती )
फूली जाली कवाईं, फूली जाली कवाईं
न आई बेटी समुन्दरा न आई भंडारी ज्वाईं।
फूली जाली कवाईं, फूली जाली कवाईं
न आई बेटी समुन्दर न आई भंडारी ज्वाईं।
ले लुवा गाड़ी कूटी, ले लुवा गाड़ी कूटी,
तेरी बेटी समुन्दरा सांदरा पुलौ दी छूटी।।
ले लुवा गाड़ी कूटी, ले लुवा गाड़ी कूटी,
तेरी बेटी समुन्दरा सांदरा पुलौ दी छूटी।।
(सन्दर्भ: महावीर रंवाल्टा, 2011, उत्तराखंड में रंवाइ क्षेत्र के लोक साहित्य की मौखिक परंपरा, उदगाता, पृष्ठ 48- 56 )
( इंटरनेट प्रस्तुति एवं अतिरिक्त व्याखा - भीष्म कुकरेती )
फूली जाली कवाईं, फूली जाली कवाईं
न आई बेटी समुन्दरा न आई भंडारी ज्वाईं।
फूली जाली कवाईं, फूली जाली कवाईं
न आई बेटी समुन्दर न आई भंडारी ज्वाईं।
ले लुवा गाड़ी कूटी, ले लुवा गाड़ी कूटी,
तेरी बेटी समुन्दरा सांदरा पुलौ दी छूटी।।
ले लुवा गाड़ी कूटी, ले लुवा गाड़ी कूटी,
तेरी बेटी समुन्दरा सांदरा पुलौ दी छूटी।।

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