क्रोध भाव अभिनय: रोष भावो पाठ खिलण व उदाहरण
अस्यविकृष्टनासापुटोद्वृत्तनयनसंदाष्टोष्ठपुटगंडस्फुरणादिभिरनुभावैरभिनय: प्रयोक्तव्य: I 7. 14 की परवर्ती कारिका )
अनुवाद/व्याख्या -
क्रोध (रोष, रुस्याणौ ) कs पाठ खिAngry लणौ कुण फुल्यां नकध्वड़ (नथुने ), पसरीं आँख (फैली आँख), गोळ -गोळ आंख करण से , हिल्दा ऊंठ या कनपट्टी क हिलण -डुलण का करतब/क्रिया करे जांदन। मख विकृत करण, ऊंठ कटण , लात -घूंसा चलाण, दांत किटण से बि रोष भावौ पाठ खिले जांद।
( कैक द्वारा अपमानित हूण पर , इच्छा /गाणी -स्याणी विरुद्ध फल प्राप्ति , बोल -चाल म कै से हार से , प्रतिपक्ष से हरण आदि से रोष भाव उतपन्न हूंद )
भीष्म कुकरेती द्वारा गढवाली लोक नाटकों का काव्य शास्त्रीय विश्लेष्ण मे दिया गया एक उदाहरण
हम जब पढ़ते थे तो हमने एक बार गोर चारागाह में एक नाटक खेला था। इसमें हमने फेल होने पर किस प्रकार हमारे संरक्षक हमारे साथ क्रोध कर
वर्ताव करेंगे का नाटक खेला था।
एक संरक्षक (ताली पीट पीटकर )- ये हराम का बच्चा ! ये साल बी फेलह्वे ग्ये हैं ? कन बत्वार आयि तेरी …
दूसरा संरक्षक (अपने लडके के बाल झिंझोड़ते हुए, दांत किटद ) -हूँ ! हूँ ! बाळु पर तरोज तेल इन लगांदु छौ जन बुल्यां कै सौकारौ नौनु ह्वेलु। अर पास हूंद दैं … पास हूंद दैं ब्वे मरी गे छे तेरी ? हैं ! आज जिंदु हि खड्यारण मीन तू !
तीसरा संरक्षक (अलग अलग ढंग से अपने फेल हुए पुत्र को लात मारते हुए)- हूँ ! जब मि बुल्दु छौ बल बुबा किताब पौढ़ी लेदि त तू चट कबि गुच्छीखिलणो भाजि जांदि छे , त कबि नाचणों भाग जांदि छौ अर कबि रामलीला दिखणो तेरी टुटकी लग जांदि छे। अर पास हूंद दैं … तेरी डंडलि सजे
गे हैं ?

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