क्रोध भाव अभिनय: रोष भावो पाठ खिलण व उदाहरण अस्यविकृष्टनासापुटोद्वृत्तनयनसंदाष्टोष्ठपुटगंडस्फुरणादिभिरनुभावैरभिनय: प्रयोक्तव्य: I 7. 14 की परवर्ती कारिका ) अनुवाद/व्याख्या - क्रोध (रोष, रुस्याणौ ) कs पाठ खिAngry लणौ कुण फुल्यां नकध्वड़ (नथुने ), पसरीं आँख (फैली आँख), गोळ -गोळ आंख करण से , हिल्दा ऊंठ या कनपट्टी क हिलण -डुलण का करतब/क्रिया करे जांदन। मख विकृत करण, ऊंठ कटण , लात -घूंसा चलाण, दांत किटण से बि रोष भावौ पाठ खिले जांद। ( कैक द्वारा अपमानित हूण पर , इच्छा /गाणी -स्याणी विरुद्ध फल प्राप्ति , बोल -चाल म कै से हार से , प्रतिपक्ष से हरण …
शोक भाव अभिनय / शोक भावक पाठ खिलण सस्वनरुदिताक्रांदितदीर्घानि: श्वसितजडतोन्मादमोहमरणादिभिरनुभावैरभिनय: प्रयोक्तव्य: I (७। १० को परवर्ती कारिका ) शोक भावक पाठ खिलणो कुण शनैः शनैः रूण , कबि कबि किराण,कबि लम्बी सांस लीण /उसासी लीण , कबि जम जाण /जड़ ह्वे जाण , कबि बौळेण , कबि मोह दिखाण, कबि मोरण जन करतबों अनुकरण आदि जन अभिनय करे जांद। गढ़वाली हंत्या जागर शोक भाव को सबसे उत्तरम उदाहरण च। इखम एक हन्त्या जागर व एक लोक गीत दिए गेन जो शोक भाव दर्शांदन - हंत्या जागर का प्रथम भाग मृत पितर अथवा पुरखों की लालसा को गढवाली-कुमाउनी में हंत्या कहते हैं ओ ध्य…
हास भाव अभिनय /हौंस चित्त वृति कु पाठ खिलण परचेष्टानुकरणाद्धास: समुपजायते । स्मितहासातिहसितैरभिनय: स पण्डितै । 7 . 10 । हास क पाठ खिलणौ (अभिनय ) कुण हौर लोकुं कार्य क उपहासपूर्ण अनुकरण 'हास' तै जन्म दींद। यांक अतिरिक्त, अनर्थक अव्यवस्था पैदा करण ,दोष दृष्टि से छिद्रान्वेषण करण पर जु रौंस मिल्द वी 'हास' चित्त वृति च। हौस उत्पन्न हूण से हौंस लगद /आंद। हौंस छह प्रकार कु हूंद - स्मित - म दंत पाटी नि दिख्यांदि , गल्वड़ थोड़ा फुल्यां, अर दृष्टि सुंदर व कटाक्ष युक्त हूंद। हसित - मुख अर आँख चौड़ा (विकसित ) होवन , गल्वड़ पूर फुल्यां ह्वाव…
रति भाव व अभिनय / रति भाव का पाठ कनै खिलण तामभिनयेत्स्मितवदनमधुरकथनभ्रूक्षेपकटाक्षदिभिरनुभावै: (7 .8 को परिवर्ती भाग ) रति पाठ खिलणोकुण मुख पर मिठास , मुस्कान, कोमल भंगिमा , मिठ बोल , भृकुटि विक्षेप / धनुष चढ़ाण जन प्रतिक्रिया , कटाक्ष आदि क्रियाओं क अनुसरण करण पड़द। एक गढ़वाली लोकनाटक स्त्रियों द्वारा गीतुं (चैत ) म खिले गे छौ। नाटक एक सत्य घटना पर आधारित छौ अर तब लक गीत बि प्रचलित ह्वे छौ। घटना छे बल एक अध्यापक का ब्यौथा स्त्री से अवैध संबंध ह्वे गे तो प्रेमालाप - अध्यापक (प्रेमिका तै प्रसन्न करणो पर्यटन करदो ) -हे बांद ! तू आज भौति बिगड़ैलि ल…
स्थायी भाव रतिहसिसश्च शोकश्च क्रोधोत्साहौ भयं तथा । जुगुप्सा विस्मयश्चेति स्थायी भावा: प्रकीर्तिता: । अध्याय 6 , 17 । स्थायी भाव आठ छन - रति, हास्य शोक , क्रोध , उत्साह , भय अर विस्मय। भरत नाट्य शास्त्र अनुवाद , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई भरत नाट्य शास्त्रौ शेष भाग अग्वाड़ी अध्यायों मा
अद्भुत रस अभिनय : अद्भुत (खौंळेणो पाठ खिलण ) स्पर्शग्रहोल्लुकसनैर्हाहाकारैश्च सादुवादैश्च I वेपथुगद्गदवचनै: स्वदेाद्यरभिनयस्तस्य I । 6 . 76 । अद्भुत रसौ पाठ खिलण कुण कै वस्तु तै देखिक खौंळेण से , अचाणचक हाहाकार करण से , कै तै साधुवाद दीण से या बड़ैं करण से , सरैल म कम्पन पैदा करण से , गौळ गदगद करण से , या स्वेद आण से दिखाए जांद।
बीभत्स रस अभिनय/बीभत्स रसौ पाठ खिलण मुखनेत्रविकूणनया नासाप्रच्छादनावनमितास्यै : अव्यक्तपादपतनैर्बीभत्स: सम्यगभिनेय: I I (6 . 74 ) बीभत्स रसौ पाठ खिलणौ कुण मुक अर आंख तै संकुचित करण, नाक ढकण से , मुंड झुकाण से , अर उल्ट -सुल्ट हिटण से अभिनय हूंद। उदाहरण - मार्ग गुंवड़ को छौ। मार्ग पर जांद वैकि दृष्टि गू पर पोड़ अर वैक पुटुक तौळ अर उन्द ह्वे गे अर वु उखम इ उकै करण मिसे गे , कुछ सुंगर ऊना ऐन अर बड़ा रौंस से गोओ अर उल्टी चटण मिसे गेन। वैकि उल्टी बंद ह्वेइ छे कि तबि एक खाज वळ कुकुर ऊना आयी जैक सरैल पर लुतुक भैर अयुं छौ अर खून व पीप बगणु छौ। घीण क मा…
भयानक रस अभिनय /भयानक रसौ पाठ खिलण करचरणवेपथुस्तम्भगात्रहृदयप्रकम्पेन। शुष्कौष्ठतालुकंठैर्भयाको नित्यंभिनेय: ।। (6. 72) गढ़वाली अनुवाद भयानक रस को पाठ खिलणो (अभिनय करण ) कुण हथ -खुट कमण , सरैल कु स्तम्भित ह्वे जाण जिकुड़ीक कमण , ऊंठ -तळुक अर कंठक सुकण क करतबों से करे जांद। उदाहरण गढवाली लोक नाटकों / में भय रस वायु मसाण को भयो वर्ण मसाण वर्ण मसाण को भयो बहतरी मसाण बहतरी मसाण को भयो चौडिया मसाण *** ****** ***** ******* **** **** ***** वीर मसाण , अधो मसाण मन्त्र दानौ मसाण तन्त्र दानौ मसाण बलुआ मसाण , कलुआ मसाण , तालू मसाण ************* *********…
वीर रसो अभिनय:वीर रसौ अभिनय स्तिथिधैर्यवीर्यगवैंर्रूत्साहपराक्रमप्रभावैश्व। वाक्यैश्वाक्षेपकृतैवीर्रस: सम्यगभिनेय।। ।6. 68। वीर रसौ अभिनय स्थिरता , धैर्य, ऊर्जापूर्ण, गर्व , उछाह, पराक्रम , प्रभावपूर्ण वाणी अर साहसिक कार्जों द्वारा करण चयेंद।
हास्य रस अभिनय विकृताचारैर्वाक्यैरङ्गविकारैश्च। हासयति जनं यस्मात्तस्माज्ज्ञेयो रासो हास्य: II हास्यौ अभिनय (पाठ खिलण ) असंगत चेष्टाओं , उल्टी सीधी छ्वीं करिक अर उटपटांग लारा पैरिक जान क्रियाओं से करे जांद I
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