भयानक रस अभिनय /भयानक रसौ पाठ खिलण
करचरणवेपथुस्तम्भगात्रहृदयप्रकम्पेन।
शुष्कौष्ठतालुकंठैर्भयाको नित्यंभिनेय: ।। (6. 72)
गढ़वाली अनुवाद
भयानक रस को पाठ खिलणो (अभिनय करण ) कुण हथ -खुट कमण , सरैल कु स्तम्भित ह्वे जाण जिकुड़ीक कमण , ऊंठ -तळुक अर कंठक सुकण क करतबों से करे जांद।
उदाहरण
गढवाली लोक नाटकों / में भय रस
वायु मसाण को भयो वर्ण मसाण
वर्ण मसाण को भयो बहतरी मसाण
बहतरी मसाण को भयो चौडिया मसाण
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वीर मसाण , अधो मसाण मन्त्र दानौ मसाण
तन्त्र दानौ मसाण
बलुआ मसाण , कलुआ मसाण , तालू मसाण
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डैणी जोगणी को लेषवार , नाटक चेटको फेरवार
मण भर खेँतड़ी , मण भर गुदड़ी , लुव्वाकी टोपी बज्र की खंता
(रौख्वाळी गीत)

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