स्थायी भाव
रतिहसिसश्च शोकश्च क्रोधोत्साहौ भयं तथा ।
जुगुप्सा विस्मयश्चेति स्थायी भावा: प्रकीर्तिता: ।
अध्याय 6 , 17 ।
स्थायी भाव आठ छन - रति, हास्य शोक , क्रोध , उत्साह , भय अर विस्मय।
भरत नाट्य शास्त्र अनुवाद , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य शास्त्रौ शेष भाग अग्वाड़ी अध्यायों मा

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