करूण रस

 


अथ करुणो नाम , अब करूण रस

इष्टवधदर्शनाद्वा विषयवचनस्य संश्रवाद्वापि।
एभिभविशेषै: करूणरसो नाम संभवति । । (6.62 )

अपण प्रियजनै ह्त्या दिखण से या अप्रिय वचन सुणण आदि का विशेष भावों से उत्पन्न हूण वळ रस करुण रस हूंद। . .

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