अथ वीरो नाम /वीर रस मनोविज्ञान
भरत नाट्य शास्त्र अध्याय - 6: रस व भाव समीक्षा
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद
अथ वीरो नाम
उत्साहादध्यवसायादविषादित्वादविस्मयान्मोहात् I
विविधादर्थविशेषाद्वीररसो नाम सम्भवति II (6 ,67 )
प्रसन्न्तापूर्वक उलार , निरंतर परिश्रम, विषाद , विस्मय , मोह -शून्यता ,सतर्कता अर इनि विशिष्ठ अर्थो द्वारा उलारमूलक वीर रास उतपन्न हूंद ।

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