अथ अद्भुतो नाम , अद्भुत रस मनोविज्ञान
अथ अद्भुतो नाम
यत्त्वतिशयार्थयुक्तं वाक्यं शिल्पं च कर्म रूपं वा I
तत्सर्वमद्भुतरसे विभाव रूपं हि विज्ञेयम् II 6, 75 II
अतिशयोक्तपूर्ण वाणी , वाक्य , शिल्प /ब्यूंत अर क्रिया जांसे सभी रूपों आभास हो त वो अद्भुत रस हूंद I

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